शिवगढ़ प्रेस । दुर्ग
दुर्ग के पुलगांव स्थित वृद्ध आश्रम से आई एक घटना ने समाज को आईना दिखा दिया है। जिस स्थान को बुजुर्गों के जीवन का सुरक्षित और शांत ठिकाना माना जाता है, वहीं एक बुजुर्ग महिला के साथ हिंसा की शर्मनाक घटना सामने आई है। आश्रम में रहने वाली गीता तिवारी पर उसी आश्रम के एक अन्य निवासी द्वारा हमला किए जाने का आरोप है, जिससे उनके सिर में गंभीर चोट आई और खून बहने लगा।
अचानक माहौल हुआ तनाव पूर्ण
20 दिसंबर 2025 की सुबह करीब 11 बजे वृद्ध आश्रम का माहौल अचानक तनावपूर्ण हो गया। आश्रम में कार्यरत भृत्य पार्थ सिंह, जो वर्ष 2018 से यहां सेवा दे रहे हैं, को आश्रम निवासी आनंद कुमार सोनी ने सूचना दी कि गीता तिवारी के साथ मारपीट हुई है। सूचना मिलते ही वे दौड़ते हुए मौके पर पहुंचे।
गाली, धमकी और फिर हमला
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, आरोपी पन्नालाल सोनी ने पहले गीता तिवारी के साथ मां-बहन की अश्लील गालियां दीं। इसके बाद उन्हें जान से मारने की धमकी दी गई। बात यहीं नहीं रुकी—आरोपी ने महिला को लात मारी और हाथ से जोरदार धक्का दे दिया। धक्का लगने से गीता तिवारी पास में लगे झूले के लोहे के पाइप से टकरा गईं, जिससे उनके सिर में गंभीर चोट आई।
खून से लथपथ जमीन पर गिरी महिला
घटना के बाद गीता तिवारी जमीन पर गिर पड़ीं। उनके सिर से लगातार खून बह रहा था। यह दृश्य देखकर आश्रम में मौजूद अन्य बुजुर्ग और कर्मचारी सहम गए। कुछ देर के लिए पूरे आश्रम में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
डायल 112 ने बचाई जान
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए पार्थ सिंह ने तुरंत डायल 112 पर कॉल कर पुलिस सहायता मांगी। साथ ही आश्रम के प्रबंधक दीपक कुमार को सूचना दी गई। कुछ ही देर में स्टाफ नर्स मनीषा पाटिल मौके पर पहुंचीं और प्राथमिक उपचार किया गया।
अस्पताल में चल रहा इलाज
पुलिस वाहन से घायल गीता तिवारी को पहले जिला अस्पताल दुर्ग ले जाया गया। परिजनों को सूचना मिलने के बाद उन्हें सेक्टर-09 अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां फिलहाल उनका इलाज जारी है। डॉक्टरों की निगरानी में महिला की हालत पर नजर रखी जा रही है।
प्रत्यक्षदर्शी और कार्रवाई की मांग
इस पूरी घटना को सोहद्रा मोहबीया ने अपनी आंखों से देखा और कानों से सुना है। मामले की लिखित शिकायत दर्ज कराई गई है और आरोपी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग उठ रही है।
वृद्ध आश्रम जैसे संवेदनशील स्थान पर हुई यह घटना न सिर्फ कानून-व्यवस्था, बल्कि बुजुर्गों की सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े करती है।
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