शिवगढ़ प्रेस / दुर्ग , – दीपावली का पर्व रोशनी और उम्मीद का प्रतीक माना जाता है, और इसी उम्मीद को नई दिशा देने का काम कर रही हैं भिलाई सेक्टर-5 की निधि चंद्राकर। उन्होंने न सिर्फ खुद को आत्मनिर्भर बनाया, बल्कि अब तक लगभग 6500 महिलाओं के जीवन में स्वरोजगार की ज्योति जला चुकी हैं।
निधि चंद्राकर ने वर्ष 2020 में अपने इस अभियान की शुरुआत मात्र 10 महिलाओं के साथ की थी। घर-परिवार की जिम्मेदारियों से फुर्सत के बाद कुछ नया करने की सोच ने उन्हें प्रेरित किया कि क्यों न ऐसा काम किया जाए जो घरेलू माहौल में रहकर भी आर्थिक स्वतंत्रता दे सके। इसी सोच से उन्होंने “छत्तीसगढ़ उड़ान नई दिशा संस्था” की नींव रखी, जो आज पूरे प्रदेश में महिला सशक्तिकरण का पर्याय बन चुकी है।
दीपावली स्पेशल उत्पादों की मांग देश-विदेश में
संस्था की सबसे बड़ी पहचान गोबर से बने पर्यावरण अनुकूल दीये और मूर्तियां हैं। इन दीयों की खासियत यह है कि ये पानी में तैरते हैं और पूरी तरह इको-फ्रेंडली हैं। दीपावली के दौरान इन दीयों की भारत ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी बड़ी मांग रहती है। अब तक उनके बनाए उत्पाद स्विट्जरलैंड कतर लंदन दुबई सहित कई अन्य देशों में करियर के माध्यम से भेजे जा रहे हैं। निधि बताती हैं कि शुरूआती वर्षों में इन्हें राज्य सरकार और स्थानीय निकायों से भी विशेष प्रोत्साहन मिला था, जिससे महिलाओं का आत्मविश्वास बढ़ा।
इसके अलावा सजावटी थाली, करवा चौथ की पूजा सामग्री, शुभ-लाभ के प्रतीक, वंदनवार, स्वागत माला और दूल्हा-दुल्हन के गिफ्ट सेट जैसी वस्तुएं भी संस्था की महिलाएं तैयार करती हैं। हाल के वर्षों में हालांकि गोबर उत्पादों की मांग में थोड़ी गिरावट आई है, पर महिलाएं अब ऑर्गेनिक गुलाल, बांस (बैम्बू) के डेकोरेटिव आइटम्स, फैंसी राखियां और धान के बैज जैसे नये प्रोडक्ट्स पर फोकस कर रही हैं।

धान से बनी राखियां और बैज बने हिट
संस्था की महिलाओं ने धान से राखी और बैज बनाकर अपनी रचनात्मकता का बेहतरीन उदाहरण दिया है। आजादी की 50वीं वर्षगांठ पर बनाए गए धान के बैज ने लोगों के दिलों में खास जगह बनाई थी। इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए इस वर्ष भी 12 हजार राखियों की बिक्री देश के विभिन्न राज्यों और विदेशों में की गई।
प्रशिक्षण से लेकर उड़ान मार्ट तक
“उड़ान नई दिशा” संस्था पिछले छह वर्षों से महिलाओं को रोजगारोन्मुखी प्रशिक्षण दे रही है। सिलाई, फूड प्रोसेसिंग, क्राफ्ट वर्क, ब्यूटी प्रोडक्ट्स, आर्गेनिक रंग और पारंपरिक व्यंजन बनाने की ट्रेनिंग देकर महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाया जा रहा है।

महिलाओं के बने उत्पादों को बाजार तक पहुँचाने के लिए संस्था हर वर्ष “उड़ान मार्ट” के नाम से विशेष प्रदर्शनी आयोजित करती है। यह आयोजन तीज, राखी और दीपावली जैसे त्योहारों पर होता है। इसमें 70-80 स्टॉल लगाए जाते हैं, जहाँ घर-घर में बने उत्पादों की बिक्री और प्रदर्शनी होती है। यह सिर्फ मार्केट नहीं, बल्कि महिलाओं के सपनों को उड़ान देने का एक मंच है।
मिलेट्स कैफे और सरकारी योजनाओं से जोड़ने की पहल
संस्था महिलाओं को शासन की योजनाओं से जोड़ने के साथ-साथ उन्हें मिलेट्स (श्रीअन्न) आधारित उत्पादों के प्रशिक्षण भी दे रही है। निधि बताती हैं कि संस्था महिलाओं को मिलेट्स कैफे और कार्ट शुरू करने के लिए प्रेरित कर रही है, ताकि वे आधुनिक बाजार में स्वस्थ जीवनशैली के उत्पादों के साथ अपनी जगह बना सकें।
निधि चंद्राकर ने कहा
निधि कहती हैं — “अगर महिलाएं चाहें तो घर की चारदीवारी से निकलकर पूरे समाज की दिशा बदल सकती हैं। दीपावली की असली रोशनी वही है जो किसी के जीवन में उम्मीद जगाए।”
भिलाई की निधि चंद्राकर और उनकी “उड़ान नई दिशा” संस्था न सिर्फ महिलाओं को आत्मनिर्भर बना रही हैं, बल्कि दीपावली जैसे त्योहारों को भी स्थानीय उत्पादों और स्वदेशी भावना से जोड़ रही हैं। गोबर के दीयों की रोशनी से लेकर धान की राखी तक — यह केवल हस्तशिल्प नहीं, बल्कि “आत्मनिर्भर भारत” की असली चमक है।
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