शिवगढ़ प्रेस / दुर्ग , – छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले के अंजोरा चौकी पुलिस ने रोजगार की उम्मीद में लोगों को झांसा देकर लाखों रुपए ठगने वाले गिरोह का पर्दाफाश करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपी भेषराम देशमुख और उसका बेटा रविकांत देशमुख, दोनों राजनांदगांव निवासी अरुण मेश्राम के कहने पर लोगों को रायपुर स्थित मंत्रालय में चपरासी की नौकरी दिलाने का लालच देकर रकम ऐंठते थे। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 420 (धोखाधड़ी) और 34 (समान मंशा) के तहत मामला दर्ज कर उन्हें न्यायालय में पेश किया, जहाँ से उन्हें जेल भेज दिया गया। वहीं तीसरे आरोपी अरुण मेश्राम की तलाश की जा रही है।
पुलिस प्रवक्ता पद्मश्री तंवर से मिली जानकारी के मुताबिक ग्राम चिरचार, जिला बालोद निवासी संतराम देशमुख ने शिकायत दर्ज कराई। उसने पुलिस को बताया कि उसकी तीन बेटियाँ और एक बेटा है। बड़ी बेटी का विवाह सात वर्ष पूर्व सुरेगांव निवासी ज्ञानी देशमुख से हुआ था, जो बेरोजगार है। वहीं बेटा ओमप्रकाश 12वीं के बाद पढ़ाई छोड़ चुका है। ऐसे में परिवार आर्थिक संकट से गुजर रहा था। इसी दौरान जून 2022 में भेषराम देशमुख उनके घर आया और दावा किया कि उसका बेटा मंत्रालय में चपरासी के पद पर कार्यरत है और उसे 40 हजार रुपए मासिक वेतन मिल रहा है।

भेषराम ने यह भी बताया कि राजनांदगांव निवासी अरुण मेश्राम मंत्रालय में अधिकारी है, जो इच्छुक लोगों की नौकरी लगवाने में मदद कर सकता है। भरोसे में आए संतराम ने अपने बेटे और दामाद की नौकरी लगवाने का आग्रह किया। आरोपियों ने छह महीने में नौकरी दिलाने का भरोसा देकर दोनों से ढाई-ढाई लाख रुपए कुल पाँच लाख रुपए ऐंठ लिए।
पैसों की व्यवस्था के लिए संतराम ने अपनी जमीन बेचकर रकम जुटाई और सर्टिफिकेट भी आरोपियों को सौंप दिए। लेकिन लंबे समय तक कोई नौकरी नहीं लगी। मंत्रालय में जाकर जांच की गई तो कोई रिकॉर्ड नहीं मिला। बाद में जानकारी मिली कि इसी तरह आठ अन्य लोगों से 19.40 लाख रुपए की ठगी की जा चुकी है।
पुलिस प्रवक्ता ने बताया कि पुलिस ने आरोपियों से पूछताछ शुरू कर दी है। तीसरे आरोपी की तलाश में टीम लगी हुई है।



















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