शिवगढ़ प्रेस , दुर्ग – दाऊ वासुदेव चंद्राकर कामधेनु विश्वविद्यालय, दुर्ग में चतुर्थ दीक्षांत समारोह का भव्य आयोजन गुरुवार 29 जनवरी 2026 को किया जाएगा। यह कार्यक्रम पशुचिकित्सा एवं पशुपालन महाविद्यालय परिसर, अंजोरा में प्रातः 11 बजे से प्रारंभ होगा। दीक्षांत समारोह को लेकर विश्वविद्यालय परिसर में तैयारियां पूर्ण कर ली गई हैं और विद्यार्थियों में खासा उत्साह देखने को मिल रहा है।

राज्यपाल की अध्यक्षता में होगा दीक्षांत समारोह
चतुर्थ दीक्षांत समारोह की अध्यक्षता राज्यपाल एवं कुलाधिपति रमेन डेका करेंगे। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। वहीं आदिम जाति विकास, कृषि विकास एवं किसान कल्याण, जैव प्रौद्योगिकी, मछली पालन एवं पशुधन विकास विभाग के मंत्री राम विचार नेताम विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे। यह समारोह राज्य के उच्च पशु चिकित्सा एवं कृषि शिक्षा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण अवसर माना जा रहा है।

दीक्षांत उद्बोधन और दीक्षोपदेश
दीक्षांत समारोह के दौरान राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड, आनंद (गुजरात) के अध्यक्ष डॉ. मीनेश सी शाह दीक्षांत उद्बोधन प्रस्तुत करेंगे। विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. आर.आर.बी. सिंह द्वारा उपाधि धारकों को दीक्षोपदेश दिया जाएगा, जिसमें विद्यार्थियों को अपने ज्ञान और कौशल का समाज एवं राष्ट्रहित में उपयोग करने का संदेश दिया जाएगा।
1536 विद्यार्थियों को मिलेगी उपाधि
इस गरिमामयी समारोह में विश्वविद्यालय के कार्यपरिषद, प्रशासनिक परिषद एवं विद्या परिषद के सदस्य, कुलसचिव, वित्त अधिकारी, निदेशक, अधिष्ठाता, प्राध्यापक एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहेंगे। समारोह में पशुचिकित्सा एवं पशुपालन, दुग्ध प्रौद्योगिकी और मात्स्यिकी संकाय के कुल 1536 उत्तीर्ण विद्यार्थियों को स्नातक, स्नातकोत्तर एवं पीएचडी की उपाधियां प्रदान की जाएंगी।
स्वर्ण पदक और विशेष सम्मान
दीक्षांत समारोह में 45 मेधावी उपाधि धारकों को विश्वविद्यालय स्वर्ण पदक प्रदान किया जाएगा। इसके साथ ही पशुचिकित्सा एवं पशुपालन संकाय के 8 स्नातक विद्यार्थियों को पं. तीरथ प्रसाद मिश्रा मेमोरियल स्वर्ण पदक से सम्मानित किया जाएगा। उपाधि प्राप्त करने वाले सभी विद्यार्थियों के लिए निर्धारित अकादमिक परिधान अनिवार्य रखा गया है।
चतुर्थ दीक्षांत समारोह न केवल विद्यार्थियों के शैक्षणिक सफर का महत्वपूर्ण पड़ाव होगा, बल्कि छत्तीसगढ़ में पशु चिकित्सा, दुग्ध एवं मत्स्य शिक्षा के सुदृढ़ भविष्य की दिशा में एक प्रेरणादायी अवसर भी साबित होगा।
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