पति की मौत के बाद शुरू हुआ उत्पीड़न का सिलसिला
शिवगढ़ प्रेस / दुर्ग , – छत्तीसगढ़ के औद्योगिक शहर भिलाई से सामने आया यह मामला सिर्फ पारिवारिक विवाद नहीं, बल्कि महिला उत्पीड़न, अंधविश्वास, संपत्ति विवाद और सिस्टम की सुस्ती का खतरनाक मिश्रण बन गया है। पति की मौत के बाद एक महिला को ‘टोन्ही’ कहकर मानसिक यातना, पांच लाख रुपये की मांग, जमीन हड़पने का दबाव, और अंत में बच्ची से जबरन अलग कर देने के गंभीर आरोप सामने आए हैं। हैरानी की बात यह है कि महिला द्वारा शिकायत के बावजूद महिला थाना भिलाई ने महीनों तक कोई कार्रवाई नहीं की, जिसके बाद अदालत को हस्तक्षेप करना पड़ा।
न्यायालय के आदेश से दर्ज हुआ अपराध
मामला महिला थाना सेक्टर-06 भिलाई का है, जहां माननीय न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी दुर्ग श्रीमती अंजली सिंह के आदेश पर धारा 498A और 34 भादवि के तहत अपराध पंजीबद्ध किया गया है। यह कार्रवाई धारा 156(3) दंप्रसं के अंतर्गत न्यायालय के निर्देश पर की गई, जो पुलिस निष्क्रियता की ओर सीधा इशारा करती है।
कौन है पीड़िता और कौन आरोपी
पीड़िता पूनम वर्मा, पति स्व. अश्वनी वर्मा की पत्नी हैं। उनका विवाह 12 मई 2014 को हुआ था। पति की मौत 15 अक्टूबर 2018 को हो गई। उनकी एक 8 साल की बेटी काव्या है।
आरोपी बनाए गए हैं—विजय वर्मा (ससुर) , शिवकुमारी वर्मा (सास) , सुरेश वर्मा (देवर) यह तीनों निवासी लवकुश नगर, लेबर कैंप, जामुल, दुर्ग हैं।
‘टोन्ही’ बताकर मानसिक और सामाजिक उत्पीड़न
पीड़िता का आरोप है कि पति की मृत्यु के कुछ ही दिनों बाद ससुराल पक्ष ने उसे टोन्ही (डायन) कहना शुरू कर दिया। सास शिवकुमारी बार-बार ताना देती थी—
“पता नहीं का टोन्हा करथस”
इतना ही नहीं, उस पर अवैध संबंध होने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए। यह न सिर्फ मानसिक यातना थी, बल्कि समाज में बदनाम करने की साजिश भी।
5 लाख की मांग और जमीन हड़पने का दबाव
पूनम वर्मा के पति के नाम ग्राम बोड़ में दो एकड़ जमीन थी। आरोप है कि देवर सुरेश वर्मा उस जमीन को अपने नाम कराने का दबाव बनाने लगा। जब पीड़िता ने इनकार किया तो उत्पीड़न और तेज हो गया।
ससुराल पक्ष ने साफ कह दिया—
“पांच लाख रुपये मायके से लेकर आओ, तभी इस घर में रहोगी।”
जबरन कार में बैठाकर घर से निकाला
मामले का सबसे गंभीर पहलू 17 जून 2023 का है। आरोप है कि पीड़िता को एक ही कपड़े में जबरन कार में बैठाकर उसके मायके ग्राम दनिया छोड़ दिया गया।
उस वक्त— न दस्तावेज थे , न गहने , न पैसे , न उसकी बेटी। पीड़िता करीब 15 दिन एक ही कपड़े में मायके में रही, जबकि उसकी 8 साल की बच्ची ससुराल में ही रखी गई।
बच्ची को भी बनाया बंधक
जब पीड़िता अपने माता-पिता और चाचा के साथ बच्ची को लेने ससुराल पहुंची, तो उसे घर में घुसने तक नहीं दिया गया। बच्ची को अंदर छिपा लिया गया और परिवार को अपमानित कर भगा दिया गया।
यह मामला तब और गंभीर हो गया जब पुलिस ने भी कहा—
“बच्ची कोर्ट से ही मिलेगी।”
SDM कोर्ट से मिली बच्ची
आखिरकार पीड़िता ने दुर्ग न्यायालय में आवेदन दिया। इसके बाद 20 अक्टूबर 2023 को SDM कोर्ट के आदेश पर बच्ची काव्या को मां के सुपुर्द किया गया। यह सवाल खड़ा करता है कि अगर अदालत का सहारा न लिया जाता, तो क्या बच्ची वापस मिलती?
गहने, नकदी और दस्तावेज भी जब्त
पीड़िता ने आरोप लगाया कि—
सोने-चांदी के गहने
बच्ची का सोने का लॉकेट
आधार, पैन, ATM कार्ड
1.50 लाख रुपये नकद
सभी अलमारी में थे, जिसकी चाबी छीन ली गई।

महिला थाना की भूमिका पर उठे सवाल
सबसे बड़ा विवाद महिला थाना भिलाई की भूमिका को लेकर है। पीड़िता ने 27 अक्टूबर 2023 को लिखित शिकायत दी, लेकिन कोई FIR दर्ज नहीं की गई। करीब दो महीने बाद उसे कोर्ट जाने की सलाह दी गई।
अब न्यायालय के आदेश पर मामला दर्ज होना पुलिस कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
अब क्या?
फिलहाल मामला विवेचना में लिया गया है। हालांकि परिवाद में 406 IPC और छत्तीसगढ़ टोनही प्रताड़ना अधिनियम की धाराएं लगाने की मांग थी, लेकिन अभी केवल 498A/34 में अपराध दर्ज हुआ है।
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