शिवगढ़ प्रेस, – स्कूल शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव ने मंगलवार को जिला पंचायत राजनांदगांव के सभाकक्ष में दुर्ग संभाग स्तरीय विस्तृत समीक्षा बैठक ली। इस महत्वपूर्ण बैठक में दुर्ग, बालोद, बेमेतरा, राजनांदगांव, कबीरधाम, खैरागढ़- छुईखदान-गंडई और मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिलों के शिक्षा अधिकारियों की उपस्थिति रही। बैठक में शिक्षा की गुणवत्ता, शिक्षकों की उपस्थिति, युक्तियुक्तकरण के तहत स्थानांतरण, परीक्षा परिणाम, दूरस्थ क्षेत्रों में शिक्षा की चुनौतियाँ और बच्चों में सीखने की अभिरुचि बढ़ाने जैसे अहम मुद्दों पर गहन विमर्श हुआ।
शिक्षा की गुणवत्ता पर मंत्री सख्त— “फील्ड में जाएं अधिकारी”
स्कूल शिक्षा मंत्री ने सभी डीईओ और बीईओ को स्पष्ट निर्देश दिया कि वे नियमित रूप से स्कूलों का निरीक्षण करें। उन्होंने कहा—
“शिक्षा की गुणवत्ता केवल बैठकों में नहीं, बल्कि स्कूलों के कमरों में और बच्चों के सीखने में दिखाई देनी चाहिए।” उन्होंने जोर देकर कहा कि स्कूलों में पढ़ाई के स्तर में जमीनी बदलाव लाने के लिए अधिकारियों का फील्ड भ्रमण अनिवार्य है।

युक्तियुक्तकरण पर सख्त समीक्षा— ज्वाइनिंग नहीं करने वाले शिक्षकों पर कार्रवाई
मंत्री यादव ने युक्तियुक्तकरण के अंतर्गत हुए शिक्षकों के स्थानांतरण की समीक्षा करते हुए स्पष्ट कहा कि जिन शिक्षकों ने अभी तक अपनी नई जिम्मेदारी नहीं संभाली है, उनके विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने निर्देश दिया कि शासन की नीति का पालन हर हाल में सुनिश्चित किया जाए।
दूरस्थ क्षेत्रों में शिक्षा पर विशेष फोकस
बैठक में दूरस्थ व आदिवासी क्षेत्रों में शिक्षा की स्थिति पर विशेष चर्चा हुई। मंत्री ने कहा कि ऐसे इलाकों में पढ़ाई में किसी तरह की कमी न आए, इसके लिए जियो-टैगिंग, उपस्थिति की डिजिटल मॉनिटरिंग और सतत निरीक्षण को मजबूत किया जाए। उन्होंने बताया कि “दूरस्थ क्षेत्रों के बच्चों तक भी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुँचना सरकार की प्राथमिकता है।”
परीक्षा परिणाम सुधारने के लिए रणनीति— “बच्चों को दें अभ्यास और सही माहौल”
मंत्री ने कहा कि जब शिक्षक उत्कृष्ट कार्य करेंगे, तब ही परीक्षा परिणामों में सुधार होगा। उन्होंने प्राथमिक से लेकर उच्च माध्यमिक तक सभी कक्षाओं में सतत मूल्यांकन की व्यवस्था को मजबूत करने के निर्देश दिए।
उन्होंने कहा—
“प्राथमिक कक्षाओं में बच्चों को 20 तक पहाड़ा और कक्षा 6 से 8 के छात्रों को 25 तक पहाड़ा याद होना चाहिए।”

शिक्षकों का प्रशिक्षण और नई शिक्षा नीति की समझ अनिवार्य
मंत्री यादव ने बताया कि नई शिक्षा नीति (NEP) के अनुरूप शिक्षकों की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। इसलिए सभी शिक्षकों को प्रशिक्षण देकर आधुनिक अध्यापन पद्धतियों में दक्ष बनाना जरूरी है। उन्होंने वर्षभर की कार्ययोजना के अनुरूप पढ़ाई सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए।
RTE के अंतर्गत निजी स्कूलों की निगरानी पर जोर
उन्होंने शिक्षा के अधिकार (RTE) के तहत निजी स्कूलों में दाखिल बच्चों की मॉनिटरिंग को और अधिक प्रभावी बनाने के निर्देश दिए। मंत्री ने कहा कि निजी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों की प्रगति समय-समय पर जांची जानी चाहिए।
कमजोर बच्चों के लिए “उपचारात्मक शिक्षण” पर जोर
संचालक लोक शिक्षण श्री ऋतुराज रघुवंशी ने कहा कि कमजोर छात्रों के लिए उपचारात्मक शिक्षण की व्यवस्था है। शनिवार को आयोजित होने वाले बैगलेस डे में ऐसे बच्चों की विशेष कक्षाएँ लेने की बात कही गई। उन्होंने सतत टेस्ट और स्मार्ट क्लास के बेहतर उपयोग पर बल दिया।
समग्र शिक्षा आयुक्त का सुझाव— “कमजोर स्कूलों को चिन्हांकित कर विशेष पैकेज”
डॉ. प्रियंका शुक्ला ने कहा कि जिन स्कूलों में सीखने का स्तर कम है, उन्हें चिन्हांकित कर योजनाबद्ध तरीके से सुधारा जाए। उन्होंने कहा कि दसवीं व बारहवीं के बेहतर परिणाम के लिए नवमीं और ग्यारहवीं की नींव मजबूत करनी होगी।
कलेक्टर राजनांदगांव की पहल— “पढ़ाई का कोना”
कलेक्टर श्री जितेंद्र यादव ने बताया कि जिले में “पढ़ाई का कोना” नामक पहल शुरू की गई है, जिसमें प्रत्येक विद्यार्थी के घर में पढ़ाई के लिए एक विशेष स्थान तैयार कराया जा रहा है, ताकि बच्चों में पढ़ने की आदत और अभिरुचि बढ़े। उन्होंने छुट्टियों से पहले अभिभावक-शिक्षक बैठक (PTM) आयोजित कर माता-पिता को भी बच्चों को प्रेरित करने की सलाह दी।
बैठक में साझा हुए अनुभव— लक्ष्य 2025-26 के लिए रोडमैप तैयार
बैठक में सभी अधिकारियों ने शिक्षण गुणवत्ता बढ़ाने के अपने अनुभव साझा किए। कक्षा 10वीं और 12वीं के परीक्षा परिणाम, प्रथम श्रेणी प्रतिशत, 80–90% से अधिक अंक लाने वाले संभावित विद्यार्थियों की संख्या, मॉडल स्कूल, पीएम श्री विद्यालय, पीएम e-विद्या चैनलों के उपयोग और आगामी वर्ष के टारगेट को लेकर व्यापक रणनीति तैयार की गई।
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