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दुर्ग ; रिसाली महापौर की बेटी दहेज प्रताड़ना से पीड़ित : दहेज न देने पर ससुराल से निकालने का आरोप—पति सहित पाँच पर मामला दर्ज

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शिवगढ़ प्रेस / दुर्ग , – रिसाली नगर निगम की महापौर की बेटी होने के बावजूद भी उसे दहेज की मांगों के कारण प्रताड़ना झेलनी पड़ी—यह बात सुनकर कोई भी चौंक सकता है। लेकिन 27 वर्षीय अल्का साहसी, जो रिसाली की महापौर शशि सिन्हा की बेटी हैं, ने अपने पति और ससुराल पक्ष पर गंभीर आरोप लगाते हुए भिलाई महिला थाना में विस्तृत शिकायत दर्ज कराई है। जांच में आरोप प्रथम दृष्टया सही पाए जाने पर पुलिस ने पति, सास, ससुर सहित पाँच लोगों के विरुद्ध बीएनएस की धारा 85, 351(3) और 3(5) के तहत अपराध दर्ज कर लिया है।

शादी के तीन दिन बाद ही बदल गया व्यवहार

अल्का साहसी की शादी 21 जनवरी 2025 को भिलाई के द मार्क रिसॉर्ट में धूमधाम से हुई थी। उनका विवाह चित्रांश साहसी से संपन्न हुआ था, जो एनएमडीसी नगरनार (जगदलपुर) में मेटालर्जिकल इंजीनियरिंग विभाग में एरिया इंचार्ज हैं।

अल्का ने अपनी शिकायत में बताया कि उनके परिवार ने विवाह में टीवी, फ्रिज, एसी, सोफा सेट, पलंग, गद्दा, ड्रेसिंग टेबल, एक लाख रुपये एक्टिवा खरीदने के लिए एवं लगभग पाँच तोला सोना, चांदी के लगभग डेढ़ किलो सामान समेत तमाम गृहस्थी का सामान दिया था।

लेकिन शादी के महज तीन दिन बाद, रिसेप्शन के दौरान ही ससुराल वालों ने “महापौर की बेटी हो, तो दहेज में फॉर्च्यूनर कार आनी चाहिए थी’’ कहकर तंज कसना शुरू कर दिया। अल्का ने बताया कि ससुराल वालों ने उनके माता-पिता को कमरे में ले जाकर कहा— “महापौर होने की हैसियत से आप लोग बीएमडब्ल्यू तक दे सकते थे, आपने फॉर्च्यूनर भी नहीं दी।” इसके बाद से उनके प्रति व्यवहार लगातार खराब होता चला गया।

जगदलपुर ले जाकर प्रताड़ित करता था पति—खाना तक नहीं खाता था

शादी के तीसरे दिन ही चित्रांश उन्हें रिसाली या दुर्ग स्थित घर ले जाने के बजाय सीधे नगरनार, जगदलपुर ले गया। अल्का का आरोप है कि— पति उनके हाथ का खाना नहीं खाता था , ,खाना बनाने में कमी निकालता था , उनके फोन पर निगरानी रखता था , घर वालों से बात करने नहीं देता था ,चरित्र पर बेबुनियाद आरोप लगाता , अक्सर गाली-गलौज और मारपीट करता था ,जान से मारने की धमकी देता था।

अल्का ने बयान दिया कि पति कहता था—
“तुम्हें छत से फेंक दूंगा, किसी को पता भी नहीं चलेगा।” साथ ही, सास शशि साहसी और ससुर ललित साहसी रोजाना फोन करके बेटे को भड़काते थे कि— “दहेज में कार नहीं मिली—तलाक दे दो।”

दहेज के नाम पर फॉर्च्यूनर कार की खुली मांग—पीड़िता को कोरे कागजों में नकली हस्ताक्षर करने पर मजबूर किया

अल्का के अनुसार, उनके पति ने 26 जनवरी को उन्हें जबरदस्ती खाली कागजों पर हस्ताक्षर करवाए और तलाक की धमकी दी। उन्हें पता चला कि पति किसी अधिवक्ता से मिल भी चुका था।

अल्का ने बताया कि पूरे ससुराल पक्ष में यह चर्चा चलती रहती थी कि—
“शादी इसलिए की कि लड़की महापौर की बेटी है, लेकिन दहेज उम्मीद से कम मिला।”

04 मार्च की बैठक—‘फॉर्च्यूनर और नकद नहीं दिया—तो अल्का को रखेंगे नहीं’

पीड़िता के माता-पिता, नानी और बहन जब नगरनार पहुंचे, तो ससुराल पक्ष ने एक मीटिंग बुलाई। बैठक में ससुर ललित साहसी, चाचा ससुर संदीप साहसी और फूफा ससुर डेरहाराम ने कथित रूप से कहा— “जब मांग के अनुसार कार और रकम नहीं दी, तो लड़की को ले जाइए… नहीं तो कुछ भी हो जाए जिम्मेदारी आपकी होगी।”

इसके बाद: अल्का को घर से बाहर निकाल दिया गया , उनके सारे सोने-चांदी के जेवर,नकद, गृहस्थी का सामान,कपड़े, बर्तन—सब रख लिए , पीड़िता अपने मायके लौट आईं और वहीं रह रही हैं।

ससुराल वालों का दुर्ग में भी दुर्व्यवहार—पीड़िता को गालियां देकर घर में घुसने नहीं दिया

मायके लौटने के बाद, अल्का के पिता सामाजिक लोगों के साथ दुर्ग स्थित ससुराल पहुंचे, ताकि बेटी को वापस घर में रखा जा सके। लेकिन वहाँ भी सास-ससुर ने घर में घुसने नहीं दिया , समाज के लोगों को भी अंदर नहीं आने दिया और पीड़िता व उसके माता-पिता से अमर्यादित गाली-गलौज की , अल्का ने बयान दिया कि उन्हें आपत्तिजनक शब्द कहे गए।

काउंसलिंग हुई—लेकिन ससुराल पक्ष नहीं माना

महिला थाना में 8 अक्टूबर को अल्का ने विस्तृत शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद काउंसलिंग की तिथियाँ निर्धारित हुईं— 14 अक्टूबर ,28 अक्टूबर ,4 नवंबर ,11 नवंबर ko लेकिन किसी भी सत्र में समझौता नहीं हो पाया। पति एवं ससुराल पक्ष ने लड़की को रखने से साफ इंकार किया।

पुलिस जांच में आरोप सही पाए गए—पाँच के खिलाफ अपराध दर्ज

पुलिस ने पीड़िता के लिखित आवेदन, बयान, काउंसलिंग रिपोर्ट और साक्ष्यों के आधार पर आरोप प्रथम दृष्टया सत्य पाए। इसके बाद महिला थाना सेक्टर-6, भिलाई ने निम्न आरोपियों पर अपराध दर्ज किया— चित्रांश साहसी (पति) , शशि साहसी (सास) , ललित साहसी (ससुर) , डेरहाराम (फूफा ससुर) , संदीप साहसी (चाचा ससुर) सभी पर बीएनएस की धारा 85, 351(3), 3(5) के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है।

महापौर की बेटी होने के बावजूद प्रताड़ना—फिर भी शांत रहीं अल्का

इस पूरे मामले में सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि पीड़िता महापौर की बेटी होने के बावजूद न तो कोई दबाव बनाया, न ही कोई राजनीतिक हस्तक्षेप किया। उन्होंने सामान्य पीड़िता की तरह महिला थाना में आवेदन दिया और न्याय की प्रक्रिया का पालन किया।

पीड़िता की मांग—“मेरे पति और ससुराल वालों पर कड़ी कार्रवाई हो”

अल्का साहसी ने पुलिस से निवेदन किया है कि—उनके आभूषण और स्त्रीधन वापस दिलाया जाए। पति और ससुराल वालों पर सख्त कानूनी कार्रवाई हो। उन्हें न्याय मिले।

Vaibhav Chandrakar

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