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रायपुर : छग उच्च शिक्षा विभाग द्वारा आयोजित दो दिवसीय कार्यशाला का समापन

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शिवगढ़ प्रेस / रायपुर.(30 जनवरी 2025) छत्तीसगढ़ शासन उच्च शिक्षा द्वारा रोड मैप टू क्वालिटी एजुकेशन विषय पर दो दिवसीय राज्य स्तरीय कार्यशाला के दुसरे दिन के वक्ता के रूप में डॉ. पुर्नेंदु सक्सेना, डायरेक्टर वी वाय हॉस्पिटल, प्रो. अमेय करकरे, आईआईटी कानपुर, पी.एन जुमले निदेशक,बोट क्षेत्रीय कार्यालय मुंबई, प्रो. एन एस भावेश, इंटरनेशनल सेंटर फॉर जेनेटिक इंजीनियरिंग एंड बायोटेक्नोलॉजी नईदिल्ली, गंगाराम पैकरा, सामाजिक कार्यकर्त्ता अंबिकापुर, डॉ. ए.के. सिंह, प्राचार्य , शा.वी.वाय.टी.पी.जी. कालेज दुर्ग, हरीश केडिया सलाहकार, छग चेम्बर ऑफ कॉमर्स उपस्थित रहें।

डॉ. पुर्नेंदु सक्सेना, डायरेक्टर वी वाय हॉस्पिटल, रायपुर ने द्वितीय सत्र का आरंभ अपने पावर पॉइंट प्रेजेंटेशन के साथ की। पावर पॉइंट प्रेजेंटेशन के माध्यम से भारतीय ज्ञान परंपरा पर आपनी बात रखते हुए कहा कि भारत में ज्ञान की परंपरा बहुत ही प्राचीन है और इसका आरंभ वेदों से माना जाता है। भारतीय ज्ञान-विज्ञान परंपरा एक समृद्ध और विविधतापूर्ण इतिहास रखती है, क्योंकि यह परंपरा हजारों सालों से चली आ रही है। जो सदियों से मानव सभ्यता को आकार देती रही है। यह परंपरा सिर्फ भारत की सीमाओं तक ही सीमित नहीं रही है, बल्कि विश्व के विभिन्न हिस्सों में इसका गहरा प्रभाव पड़ा है। साथ ही उन्होंने बताया कि हमारी भारतीय संस्कृति और सभ्यता ने सदियों से विज्ञान, गणित, खगोल, चिकित्सा, आयुर्वेद और दर्शन जैसे अनेक क्षेत्रों में अद्वितीय योगदान दिया है। भारतीय मनीषियों ने अपने गहन चिंतन और अनुसंधान से न केवल अपने देश में बल्कि वैश्विक स्तर पर भी विज्ञान और ज्ञान के क्षेत्र में महत्त्वपूर्ण स्थान हासिल किया। भारतीय ज्ञान सदियों से चला आ रहा है, जिसमे वेदों का बड़ा योगदान रहा है, वेद भारतीय सभ्यता के सबसे पुराने ग्रंथ हैं, जिनमें ज्ञान के कई आयामों का वर्णन मिलता है। ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्ववेद में प्राकृतिक विज्ञान, चिकित्सा और गणित के सिद्धांतों का वर्णन मिलता है। उपनिषद, जो वेदों के ही हिस्से हैं, भारतीय दर्शन का केंद्र बिंदु माने जाते हैं।भारतीय ज्ञान-विज्ञान परंपरा न केवल प्राचीन काल में बल्कि आज भी विज्ञान, चिकित्सा, गणित और अन्य क्षेत्रों में अपनी प्रासंगिकता बनाए हुए है। भारत के मनीषियों और वैज्ञानिकों का योगदान आने वाले समय में भी अमूल्य रहेगा। भारतीय ज्ञान की यह परंपरा हर पीढ़ी के लिए प्रेरणा स्रोत है।

कार्यशाला में गंगाराम पैकरा, सामाजिक कार्यकर्त्ता अंबिकापुर, अपने उद्बोधन में कहा कि छत्तीसगढ़ के लिये यह सुनिश्चित करना आवश्यक है, कि समाज के सभी वर्ग देश की आर्थिक और सामाजिक समृद्धि में हिस्सेदारी करें। यह व्यापक रूप से स्वीकार किया जाता है, कि भारतीय आबादी के एक बड़े हिस्से विशेष रूप से जनजातीय समुदायों को पिछले छह दशकों में कार्यान्वित विकास परियोजनाओं का पूरा लाभ नहीं मिला है। उन्होंने कहा कि जनजातीय आबादी के बीच शिक्षा का स्तर आमतौर पर राष्ट्रीय औसत से कम है। गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तक पहुँच की कमी, सांस्कृतिक बाधाएँ और भाषायी अंतर आदिवासी बच्चों के शैक्षिक विकास में बाधा हैं। प्रो. अमेय करकरे, आईआईटी कानपुर ने स्वयं व स्वयं प्लस एवं साथी के विषय में विस्तार से जानकारी दी।

इसी कड़ी में पी.एन जुमले निदेशक, बोट क्षेत्रीय कार्यालय मुंबई ने सभागार को संबोधित करते हुए अप्रेंटीश एवं एम्प्लायबिलिटी-नाट्स के विषय पर जानकारी दी। साथ ही विभिन्न महाविद्यालयों के प्राचार्यों द्वारा महाविद्यालयों के सामने आने वाली चुनातियों एवं सफलताओं के विषय पर प्रकाश डाला। वहीँ दूसरी तरफ राज्य नीति आयोग के सदस्यों ने आयोग से प्राप्त की जाने वाली विभिन्न शोध योजनाओं के फंडिंग के सन्दर्भ में विस्तार से जानकारी दी।

हरीश केडिया सलाहकार, छ.ग. चेम्बर ऑफ कॉमर्स ने कहा की एकेडिमिया एवं इंडस्ट्री के साथ मिलकर शोध एवं नवाचार पर कार्य करते हुए वर्तमान समय के अनुरूप विद्यार्थियों को तैयार किया जा सकता है। साथ ही उन्होंने कहा कि कोई भी कार्य छोटा या बड़ा नहीं होता, हमें हमारी योग्यता के अनुरूप रोजगार न मिलने की स्थिति में व्यवसाय का भी विकल्प लेकर चलना चाहिए।

अमित त्रिवेदी, प्राचार्य दिव्यांग विद्यालय मठपुरैना, रायपुर ने दिव्यांगजन विद्यार्थियों की शिक्षा एवं शिक्षण गुणवत्ता पर अपनी जानकारी प्रस्तुत की। दिव्यांग विद्यार्थियों के अनुसार शैक्षणिक वातावरण का निर्माण किये जाने, शिक्षण हेतु दिव्यांग शिक्षकों को प्रशिक्षित किये जाने व दिव्यांग शिक्षा के पाठ्यक्रम के निर्माण में सुधार लाने पर अपना विचार प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि दिव्यांगता कमी नहीं बल्कि एक अक्षमता है।

कार्यशाला में प्रदेश के विभिन्न एवं दूरस्थ अंचलों से आये शिक्षाविदों ने अपने महाविद्यालयों में की जाने वाली नवाचार कार्यों एवं विद्यार्थियों के विकास कार्यों की विभिन्न उपल्धियों को पावर पॉइंट प्रेसेंटेशन के माध्यम से प्रस्तुत किया।

कार्यशाला के अंत में उच्च शिक्षा विभाग छग शासन के सचिव प्रसन्ना आर. एवं रूसा संचालक जगदीश सोनकर ने ओपन मंच प्रश्न-उत्तर सत्र का आयोजन किया। इस दौरान कार्यशाला में उपस्थित शिक्षाविदों के जिज्ञासा एवं दुविधाओं को दूर करते हुए उनके समस्त पर्श्नों का उत्तर प्रदान किया। अंत में रूसा संचालक जगदीश सोनकर ने कार्यक्रम का आभार प्रदर्शन किया। उक्त कार्यशाला में मंच संचालन प्रो.अंजलि अवधिया एवं डॉ. नीता बाजपेयी व उनके सहयोगियों द्वारा किया गया। कार्यशाला में प्रदेश के विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों के 700 शिक्षाविद प्रतिभागी के रूप में शामिल हुए।

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Vaibhav Chandrakar

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