शिवगढ़ प्रेस / दुर्ग – दाऊ श्री वासुदेव चंद्राकर कामधेनु विश्वविद्यालय, अंजोरा में 31 जुलाई 2024 को विस्तार शिक्षा परिषद की तृतीय बैठक विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ.आर.आर.बी. सिंह के मुख्य आतिथ्य तथा निदेशक विस्तार शिक्षा डॉ. संजय शाक्य की अध्यक्षता में प्रशासनिक भवन के सभागार में संपन्न की गई।
कुलपति ने परिषद के सदस्यों को संबोधित करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय द्वारा जो भी विस्तार गतिविधियां संचालित की जा रही वह सामाजिक एवं आर्थिक महत्व की हो। साथ ही उन्होंने वैज्ञानिक पद्धति द्वारा पशुपालन करने, उन्नत चारा किस्मों को कृषकों के प्रक्षेत्र में तैयार करवाने का सुझाव दिया। आदिवासी उपयोजना (टी.एस.पी.) अंतर्गत आदिवासी हितग्राहियों को मुर्गी, चूजे, बटेर, बकरी का वितरण किया जा रहा है जिसे और सुदृढ़ करने की आवश्यकता है जिससे उनकी अच्छी आय अर्जित हो सके। किसानों एवं पशुपालकों को प्रशिक्षण के माध्यम से वैज्ञानिक पद्धति से कार्य करने के लिए प्रोत्साहित करें।
इस परिषद में निदेशक अनुसंधान सेवाएं डॉ.जी.के. दत्ता, पशुचिकित्सा महाविद्यालय बिलासपुर के अधिष्ठाता डॉ. किशोर मुखर्जी, निदेशक चिकित्सालय डॉ. एस. के.मैती, निदेशक प्रक्षेत्र डॉ धीरेंद्र भोंसले, डॉ.एम.के. अवस्थी नोडल अधिकारी पशुधन जागृति अभियान एवं मैत्री प्रशिक्षण, आदिवासी उपयोजना अंतर्गत परियोजना के प्रमुख अन्वेषक डॉ.अमित गुप्ता, विश्वविद्यालय जनसंपर्क अधिकारी डॉ.दिलीप चौधरी एवं अन्य सदस्य बैठक में सम्मिलित हुए। निदेशक विस्तार शिक्षा डॉ.संजय शाक्य ने तृतीय विस्तार शिक्षा परिषद की बैठक में विश्वविद्यालय के अंतर्गत/अधीनस्थ संचालित महाविद्यालयों, कृषि विज्ञान केंद्र एवं वेटनरी, डेयरी तथा फिशरीज, पॉलिटेक्निक में चल रही विस्तार गतिविधियों का पावर पॉइंट प्रेजेंटेशन प्रस्तुत कर आगामी वर्ष 2024-25 की विस्तार कार्य योजना की विस्तृत जानकारी एवं विगत वर्ष 2023-24 में किए गए विस्तार गतिविधियों की समीक्षा की।
डॉ.एस.एल.अली ने मात्स्यिकी महाविद्यालय कवर्धा, डॉ.ओ.पी. दीनानी ने पशुचिकित्सा एवं पशुपालन महाविद्यालय अंजोरा, डॉ.नायक ने दुग्ध विज्ञान एवं खाद्य प्रौद्योगिकी महाविद्यालय, रायपुर, डॉ.व्ही.एन.खूणे ने कृषि विज्ञान केंद्र में चल रही विस्तार गतिविधियों, प्रसार दर्पण के प्रकाशन, कृषकों, पशुपालकों के लिए कार्यशाला, सेमिनार की विस्तृत जानकारी दी।
कार्यक्रम का संचालन एवं धन्यवाद ज्ञापन डॉ. मेहताब सिंह परमार के द्वारा किया गया।
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