शिवगढ़ प्रेस / दुर्ग, – कृषि विज्ञान केंद्र, अंजोरा में छत्तीसगढ़ एवं मध्यप्रदेश के कृषि विज्ञान केन्द्रों में पदस्थ पशु विशेषज्ञों के लिए दो दिवसीय प्रशिक्षण सह-कार्यशाला का आयोजन 01 एवं 02 जुलाई को किया गया।
इस कार्यशाला के उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि डॉ.आर.आर. बी. सिंह कुलपति दाऊ श्री वासुदेव चन्द्राकर कामधेनु विश्वविद्यालय ने अपने उद्बोधन में पशुओं के नस्ल सुधार एवं स्वास्थ्य प्रबंधन में पशुपालकों को नवीन तकनीक से अवगत कराने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि महिलाओं को समूह के माध्यम से ज्यादा लाभ दिलाया जा सकता है सफल पशुपालन में हुए नवाचार से क्षेत्र के पशुपालकों को अवगत कराये जिससे वह पशुपालन के क्षेत्र में कार्य करने हेतु प्रोत्साहित हो।
कार्यक्रम के अध्यक्ष निदेशक विस्तार शिक्षा एवं अधिष्ठाता डॉ. संजय शाक्य ने उच्च गुणवत्ता के पशुओं का पालन करने, उनके पोषण प्रबंधन को वैज्ञानिक तरीके से करने की आवश्यकता बताई जिसे विशेषकर डेयरी पशुओं के पालन का व्यय कम किया जा सके। प्रदेश में लघु एवं सीमांत कृषकों की संख्या ज्यादा है इसलिए पशुपालन के माध्यम से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाना होगा।
उद्घाटन सत्र के अवसर पर इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के निदेशक विस्तार सेवाएं डॉ. अजय वर्मा ने अपने संबोधन में कहा कि पशु विशेषज्ञ अपने तकनीकी एवं व्यवहारिक ज्ञान का प्रचार प्रसार कृषको एवं पशुपालकों तक करें। उनके आर्थिक उन्नयन में पशु वैज्ञानिकों की भूमिका महत्वपूर्ण है। मैदानी एवं पहाड़ी क्षेत्र में पशुपालकों की आवश्यकता अनुसार अनुसंधान तथा प्रचार प्रसार की आवश्यकता हैं।
विशिष्ट अतिथि डॉ. एस.आर. के.निदेशक आई.सी. ए.आर अटारी ने कहा कि कृषि विज्ञान केंद्र के माध्यम से जिले की आवश्यकतानुसार कृषकों के प्रक्षेत्र में प्रमाणित तकनीकों के प्रचार प्रसार करने की आवश्यकता है। इससे पशुपालकों को अधिक आर्थिक लाभ होगा विशेषज्ञ पशुपालन की उन्नत तकनीकों को जमीनी स्तर तक पशुपालकों तक पहुंचाएं।
इस अवसर पर विश्वविद्यालय जनसंपर्क अधिकारी डॉ. दिलीप चौधरी की उपस्थिति रही। दो दिवसीय प्रशिक्षण सह-कार्यशाला में छत्तीसगढ़ एवं मध्यप्रदेश के विभिन्न कृषि विज्ञान केन्द्रों से आए 25 से अधिक वैज्ञानिकों द्वारा अपने जिले में किए गए क्षेत्र परीक्षण एवं अग्रिम पंक्ति प्रदर्शन का प्रस्तुतीकरण किया गया।
प्रशिक्षण के दौरान पशु एवं मुर्गीपालन से संबंधित विभिन्न तकनीकी विषयों पर डॉ.ए.ए.राऊत वैज्ञानिक आई.सी.ए.आर.अटारी, निदेशक शिक्षण डॉ. एस.के.मैती, प्राध्यापक डॉ. धीरेंद्र भोंसले, डॉ.एम.के.गेंदले, डॉ. ओ.पी.दीनानी एवं कार्यक्रम समन्वयक डॉ. विकास खुणे द्वारा प्रशिक्षणार्थियों को जानकारी दी गई।
कार्यक्रम के दौरान प्रशिक्षणार्थियों को पशुचिकित्सा एवं पशुपालन महाविद्यालय अंजोरा के समस्त पशु इकाईयों का भ्रमण भी कराया गया। कार्यशाला के समापन में प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र वितरण किया गया साथ ही कार्यक्रम को सफल बनाने में कृषि विज्ञान केंद्र अंजोरा के डॉ. राजकुमार गढ़पायले, डॉ.एस.के.थापक, डॉ.उमेश कुमार पटेल एवं डॉ. निशा शर्मा का सहयोग रहा।
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